तीर्थराज प्रयाग में माघ मेले का पहला स्नान, 50 लाख श्रद्धालु लगाएंगे डुबकी

तीर्थराज प्रयाग में माघ मेले का पहला स्नान, 50 लाख श्रद्धालु लगाएंगे डुबकी

इलाहाबाद-- गंगा-यमुना की पवित्र रेत पर मोक्ष प्राप्ति का अखंड तप 'कल्पवास' पौष पूर्णिमा स्नान के साथ गुरुवार से शुरू हो गया। श्रद्धालु मोह-माया से दूर एक माह तक व्रत, भजन, पूजन के जरिए 33 करोड़ देवी-देवताओं को साधेंगे।
पूर्णिमा पूर्ण करेगी मनोकामनाज्योतिर्विद आचार्य देवेंद्र प्रसाद त्रिपाठी के मुताबिक, पूर्णिमा तिथि बुधवार शाम 7.20 बजे से गुरवार शाम 5.26 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के चलते गुरवार को दिनभर इसका महत्व रहेगा। अमृत सिद्धयोग, गुर पूर्णा सिद्धि योग साधकों की मनोकामना पूर्ण करेगी। स्नान, ध्यान व दान का पुण्य मुहूर्त सुबह 5.36 से सुबह 6.47 बजे तक है। इसमें पैसे के अलावा अन्न, काला तिल, ऊन, वस्त्र व बर्तन का दान पुण्यकारी रहेगा। पौष पूर्णिमा को श्रद्धालु कल्पवास का आरंभ करेंगे।
यह है मान्यतामाना जाता है कि माघ माह में प्रयाग में न सिर्फ मानव कल्पवास करते हैं, बल्कि 33 करोड़ देवी--देवता विविध स्वरूपों में मौजूद रहते हैं। वे किसी न किसी रूप में कल्पवास करने वाले साधकों को दर्शन देते हैं। इसी आस्था के वशीभूत सनातन मतावलंबी घर-गृहस्थी, मोह-माया से दूर माह भर धार्मिक कार्यो में लीन रहते हैं। भजन, पूजन, व्रत उनके जीवन का मुख्य ध्येय बन जाता है।
यह होगा एक माह में श्रद्घालु पौषष पूर्णिमा पर संगम या गंगा स्नान के बाद कल्पवास आरंभ करेंगे। तीर्थ पुरोहितों के आचार्यत्व में मंत्रोधाार के बीच मां गंगा, वेणी माधव व पुरखों का स्मरण कर त्याग व तपस्या का व्रत शुरू किया जाएगा। शिविर के बाहर तुलसी का बिरवा लगाकर जौ बोया जाएगा। कल्पवासी घर लौटते समय उसे प्रसाद स्वरूप वापस ले जाएंगे।
यह है कल्पवासएक समय भोजन, तीन बार स्नान कल्पवास कठिन तप माना जाता है। कल्पवासी सिर्फ एक समय भोजन व दिन में तीन बार स्नान करते हैं। दान का क्रम भी चलता है। ऐसा इसलिए क्योंकि प्रयाग में दान का काफी महत्व है।परिवर्तन मानव विकास संस्थान के निदेशक ज्योतिषषाचार्य डॉ. बिपिन पांडेय के अनुसार पौषष पूर्णिमा व अन्य स्नान पर्वो के बाद यथासंभव दान करना चाहिए। अन्न, काला तिल, ऊन, वस्त्र व बर्तन का दान काफी पुण्यकारी रहता है।
दो तरह से होता है कल्पवासप्रयाग में कल्पवास दो प्रकार से किया जाता है। एक चंद्रमास व दूसरा शौर्य मास का कल्पवास। पौष पूर्णिमा से माघी पूर्णिमा तक चंद्रमास का कल्पवास रहता है। मकर संक्रांति से कुंभ संक्रांति तक शौर्य मास।गंगा-यमुना तट पर कल्पवास की परंपरा सदियों पुरानी है। माघ मेला क्षेत्र में बुधवार की रात तक 50 हजार से अधिक कल्पवासी व संत-महात्माओं ने डेरा जमा लिया था। गुरवार को संगम या गंगा में स्नान कर सभी विधिवत कल्पवास आरंभ करेंगे। टीकरमाफी आश्रम पीठाधीश्वर स्वामी हरिचैतन्य ब्रह्मचारी के मुताबिक, कल्पवास करने वाले मानव को जीते जी मोक्ष की प्रााि होती है। ऐसे व्यक्ति को फिर किसी तीर्थ जाने की जरूरत नहीं होती।
कब-कब स्नान, कितने श्रद्धालु आएंगे
तिथि - तारीख - संख्या
पौष पूर्णिमा - 12 जनवरी - 50 लाख
मकर संक्रांति - 14 जनवरी - 75 लाख
मौनी अमावस्या - 27 जनवरी - 1.5 करोड़
बसंत पंचमी - 01 फरवरी - 60 लाख
माघी पूर्णिमा - 10 फरवरी - 45 लाख
महाशिवरात्रि - 24 फरवरी - 15 लाख
किन्नर अखाड़ा भी करेगा स्नान
इस बार माघ मेले में मौनी अमावस्या पर पहली बार 13 मान्य अखाड़ों के अलावा किन्नर अखाड़े के सारे सदस्य भी स्नान करेंगे।
शंकराचार्य देंगे आशीर्वचनमेले में शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती, शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती, जगद्गुर स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती, जगद्गुर स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती, देवतीर्थ स्वामी अधोक्षजानंद सरस्वती आदि मौजूद रहेंगे।

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